कच्चा अनफिल्टर्ड शहद क्या है? फायदे और नुकसान (What Is Raw Unfiltered Honey? | Benefits & Risks)
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कच्चा अनफिल्टर्ड शहद क्या है? फायदे और नुकसान (What Is Raw Unfiltered Honey? | Benefits & Risks)

कच्चे शहद के फायदे कई सारे हैं। पहला तो यह प्रोसेसड नहीं होता है दूसरा यह कई सारे पोष्टिक आहार से भरपूर होता है। यहां से कच्चे शहद के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

8000 साल से ज्यादा समय से शहद को इस्तेमाल किया जा रहा है। यह प्राकृतिक रूप से मीठा होता है। शहद को मधुमक्खी के द्वारा बनाया जाता है और अब यह हर सुपर मार्किट में प्रोसेसड रूप में मिलता है। शहद के प्रोसेसड होने के प्रोसेस को पास्‍तुरीकरण (pasteurization) कहते हैं। प्रोसेसड शहद में शुगर होती है जो इसकी मिठास को बढ़ा देती है जिससे शहद के फायदे कम हो जाते हैं। कच्चा और शुद्ध शहद खाने के फायदे कई सारे हैं। आयुर्वेद के द्वारा यह माना गया है कि सफेद चीनी के मुकाबले शहद ज्यादा सेहतमंद होता है। अब दुनिया भर में लोगों के द्वारा भी इस बात को माना जा रहा है। कच्चे शहद में प्राकृतिक मिठास होती है और यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। लेकिन कच्चा, अनफिल्टर्ड शहद क्या होता है? कच्चा शहद और प्रोसेसड शहद में क्या अंतर है? आइए यहां से इन सारे सवालों के जवाब लेते हैं।

कच्चे शहद में प्राकृतिक मिठास होती है और यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है।

कच्चा शहद आपके घर सीधा शहद के छत्ते से आता है। इनमें से मधुमक्खी का मोम और मरी हुई मधुमक्खी को निकाला जाता है। इसके बावजूद यह प्रोसेसड शहद के मुकाबले धुंधला और अपारदर्शी दिखाई देता है। क्योंकि कच्चा शहद और अनफिल्टर्ड ज्यादा गाढ़ा होता है।

हमें शहद के फायदे सारे पता हैं तो यह भी पता होना चाहिए कि शहद किस प्रकार का है। प्रोसेसड शहद के मुकाबले कच्चा शहद ज्यादा सेहतमंद होता है। आइए यहां से कच्चे शहद के बारे में जानकारी प्राप्त कर लेते हैं।

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कच्चे और अनफिल्टर्ड शहद के फायदे (Advantages Of Raw Honey Over Processed Honey)

1. कच्चे शहद में ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट होते हैं (Raw Honey Contains More Antioxidants)

पास्‍तुरीकरण (pasteurization) में शहद को बहुत ज्यादा गर्म किया गया जाता है जिससे शहद के एंटीऑक्सीडेंट खत्म हो जाते हैं। वहीं कच्चे शहद को गर्म नहीं किया जाता है जिस कारण से इसमें एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा उतनी ही रहती है जितनी मधुमक्खी के छत्ते में रहती है। फ्री रेडिकल से लड़ने में कच्चा शहद बहुत लाभदायक है। कच्चे शहद का सेवन करने से हमारा शरीर फ्री रेडिकल से बचा रहता है।

2. इसमें मधुमक्खी पराग है (It Contains Bee Pollen)

जो चीज़ प्रोसेसड शहद में नहीं होती है वो है मधुमक्खी पराग। शहद के प्रोसेसड करने से प्रोसेस में यह निकल जाता है। लेकिन इन पराग में कई पोष्टिक आहार होते हैं जो सेहत के लिए लाभदायक हैं। मधुमक्खी के पराग में विटामिन ए और विचामिन सी होता है जो एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करते हैं। इसके अलावा मधुमक्खी के पराग में मिनरल्स भी होते हैं जैसे कि कैल्शियम और मैग्नीशियम जो हड्डियों को मजबूत करने में मदद करते हैं।

मधुमक्खी के पराग में विटामिन ए और विचामिन सी होता है जो एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करते हैं।

3. कच्चे शहद में मधुमक्खी प्रोपोलिस की एक स्वस्थ मात्रा होती है (Raw Honey Contains A Healthy Amount Of Bee Propolis)

आपको इस बात का पता होना चाहिए है कि मधुमक्खी सिर्फ शहद नहीं बनाती है। प्रोपोलिस, गाढ़ा और हरे- ब्राउन रंग का तरल होता है जो छत्ते को ढकने का काम करता है। यह कंपाउंड कच्चे शहद में मिलता है। इसमें अलग- अलग तरह के प्रोपोलिस होते हैं जिनमें अलग- अलग एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। यह चिपचिपा प्रोडक्ट एंटी- इंफ्लामेट्री और एंटी- फंगल खूबी के साथ आता है। इसके अलावा इसमें विटामिन बी, विटामिन सी, पोटेशियम और मैग्नीशियम भी पाया जाता है।

कच्चा शहद खरीदने के टिप्स (Tips To Buy Raw Honey)

सुपर मार्किट में मिलने वाला शहद कच्चा नहीं होता है। प्रोसेसड शहद सस्ता होता है जिस कारण से इसकी डिमांड भी ज्यादा है। वहीं कच्चा शहद आसानी से नहीं मिलता है। कच्चा और अनफिल्टर्ड शहद धुंधला होता है क्योंकि इसमें पराग, प्रोपोलिस औ मधुमक्खी के पंख होते हैं। कच्चा शदह गाढ़ा होता है और ज्यादा समय होने पर यह दिखने में अच्छा नहीं लगता है। इस कारण से लोग साफ और प्रोसेसड शहद की तलाश में रहते हैं।

कच्चा और अनफिल्टर्ड शहद धुंधला होता है क्योंकि
इसमें पराग, प्रोपोलिस औ मधुमक्खी के पंख होते हैं।

कच्चा शहद के नुकसान (Risks Involving Raw Honey)

कच्चा शहद के नुकसान प्रोसेसड शहद से मिलते झुलते हैं। शहद के नुकसान में से बोटुलिज़्म सबसे आम है और खासकर शिशुओं में। कच्चे शहद में क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम नाम का बैक्टीरिया पाया जाता है, जिसको खाने पर विषाक्त भोजन (food poisoning) का मुख्य कारण हो सकता है। इसलिए 12 महीने से छोटे उम्र के शिशु को शहद नहीं खिलाना चाहिए क्योंकि इनका इम्यून सिस्टम इतना स्ट्रोंग नहीं होता है कि बाहक की बीमारी से लड़ सकें।

यह भी पढ़ें- 6 शहद के नुकसान (6 Side-Effects Of Honey)

कच्चे और अनफिल्टर्ड शहद में कुछ मात्रा में मधुमक्खी पराग भी पाया जाता है। जिन लोगों को पराग से एलर्जी है वो लोग इसका सेवन ना करें। शहद से एलर्जी होने से गले में सूजन, सांस लेने में परेशानी, धब्बे और होठों में सूजन आ सकती है।

आखिर में

कच्चे शहद के बारे में अच्छे से जानकारी प्राप्त करने के बाद यह फैसला आप पर निर्भर करता है कि इसका सेवन करना चाहिए या फिर नहीं। आपको बता दें कि सही मात्रा में कच्चे शहद का सेवन करने से आपको इससे सिर्फ फायदे ही मिलेंगे।

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