म्यूसली या ग्रेनोला- ब्रेकफास्ट के लिए कौन है बेस्ट (Muesli vs. Granola: Which One Is The Healthier Breakfast Option?)
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म्यूसली या ग्रेनोला- ब्रेकफास्ट के लिए कौन है बेस्ट (Muesli vs. Granola: Which One Is The Healthier Breakfast Option?)

Request a reviewदिन की शुरुआत हेल्दी खाने से होनी चाहिए जिससे की आप पूरा दिन अच्छे से काम कर सकें। आजकल लोग तला हुआ और शुगर वाले खाने से दूर रहते हैं और सेहत के प्रति सावधानी रखते हैं। सुबह के नाश्ते में अगर म्यूसली या फिर ग्रेनोला में से कोई भी एक चीज़ शामिल […]

दिन की शुरुआत हेल्दी खाने से होनी चाहिए जिससे की आप पूरा दिन अच्छे से काम कर सकें। आजकल लोग तला हुआ और शुगर वाले खाने से दूर रहते हैं और सेहत के प्रति सावधानी रखते हैं। सुबह के नाश्ते में अगर म्यूसली या फिर ग्रेनोला में से कोई भी एक चीज़ शामिल हो तो इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है। लेकिन क्या आपको पता है म्यूसली और ग्रेनोला अलग अलग होते हैं और इनमें क्या अंतर होता है। चाहें यह दोनों दिखने में लगभग एक जैसे होते हैं लेकिन इनमें फर्क होता है। सबसे पहले तो इनको बनाने का तरीका अलग होता है साथ ही इनमें पोषण भी अलग अलग होता है। सबसे जरुरी बात यह है कि आपके शरीर को क्या चाहिए और कितना चाहिए। म्यूसलीऔर ग्रेनोला से जुड़ी अधिक जानकारी आप इस आर्टिकल से प्राप्त कर सकते हैं।

म्यूसली क्या है?

  1. म्यूसली का इतिहास- म्यूसली को 20वीं सदी के स्विस चिकित्सक मैक्सिमिलियन बिचर-बैनर ने बनाया था। जिसके बाद से ही इसको पोषण पूरा करने वाले आहार की तरह इस्तेमाल किया जाने लगा।
  2. म्यूसली को कैसे खाया जाता है- म्यूसली एक ब्रेकफास्ट फूड है जिसे ठंडे दूध के साथ ओट्स, ड्राए फ्रूट, नट्स और ग्रेन (अनाज) के साथ मिलाकर खाया जाता है। इसके अलावा इसको गर्म दूध के साथ खिचड़ी की तरह भी खाया जा सकता है।
  3. म्यूसली के फायदे- म्यूसली में एंटीऑक्सीडेंट होने के कारण यह हमारी सेहत के लिए अच्छी होती है। बाकी के ब्रेकफास्ट फूड के मुकाबले म्यूसली में शुगर की मात्रा कम होती है।
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म्यूसली में शुगर न होने के कारण यह एक
स्वस्थ ब्रेकफास्ट है।

ग्रेनोला क्या है?

  1. म्यूसली का इतिहास- ग्रनोला को 19वीं सदी में न्यूयॉर्क के डॉ. जेम्स कालेब जैक्सन के द्वारा बनाया गया था। ग्रैनोला नट्स, रोल्ड ओट्स और मिठास जैसे शहद या ब्राउन शुगर का मिश्रण है, जिसको तब तक बेक किए जाता है जब तक कि ओट्स क्रिस्प न हो जाएं और उनका रंग गोल्डन ब्राउन में बदल जाए। बेकिंग प्रक्रिया के दौरान मिश्रण को लगातार हिलाया जाता है ताकि यह ढ़ीला बना रहे।
  2. ग्रनोला को कैसे खाया जाता है- ग्रेनोला को ब्रेकफास्ट में दूध के साथ मिलाकर खाया जाता है। इसको कभी कभी दही के साथ भी खाया जाता है।
  3. ग्रेनोला के फायदे- ग्रेनोला में कार्बोहाइड्रेट अच्छी मात्रा में होता है जो कस्रत और दौड़ करने वाले लोगों को एनर्जी देता है।
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ग्रेनोला में कार्बोहाइड्रेट अच्छी मात्रा में होता है।

म्यूसली और ग्रेनोला में क्या अंतर है?

  • इन दोनों में सबसे बड़ा अंतर यह है कि ग्रेनोला को तेल और मीठी चीज़ों के साथ बेक किया जाता है वहीं म्यूसली रॉ होती है। हालाकिं दोनों ओट्स, नट्स और बीजों से बनी हुई है।
  • ग्रेनोला में बेकिंग के कारण ओट्स और नट्स का समूह बन जाता है। म्यूसली में यह सारी चीज़े अलग अलग और सूखी होती हैं।
  • म्यूसली के मुकाबले ग्रेनोला में शुगर ज्यादा होता है। ग्रेनोला में डाले गए मीठे के कारण इसमें केलोरी भी ज्यादा होती है। इससे यह भी कहा जा सकता है कि केलोरी की मात्रा म्यूसली और ग्रेनोला की मात्रा पर निर्भर करती है। जितनी मात्रा में आप खाएंगे उतनी मात्रा में आपको केलोरी मिलेगी। इन दोनों को खाने से पहले इनके पोषण लेबल को ध्यान से पढ़ लें।

आखिरी में

ऊपर दिए गए सभी अंतर के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि म्यूसली और ग्रेनोला अपने अपने पोषण के लिए सेहतमंद हैं। यह आपके शरीर पर निर्भर करता है कि आपको किसी तरह का और कितने आहार की जरुरत है।

ग्रेनोला में तेल और शुगर होने के कारण म्यूसली को थोड़ी सी बेहतर कह सकते हैं। क्योंकि म्यूसली में शुगर नहीं होती है साथ ही आपका पेट लंबे समय के लिए भरा रहता है। जो लोग केलोरी का सेवन नहीं करना चाहते हैं उन लोगों के लिए सुबह नाश्ते में म्यूसली खाना लाभदायक है।

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